
द ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक नई रिसर्च से पता चला है मंकीपॉक्स का मौजूदा प्रकोप किस तरह अफ्रीका में सामने आए पिछले स्थानीय संक्रमण से अलग हैं. इस रिसर्च में मंकीपॉक्स के लक्षणों में पिछले संक्रमण के विपरीत पाए गए महत्वपूर्ण लक्षणों की पहचान की है. इस शोध के नतीजे मई से जुलाई 2022 के बीच लंदन के एक संक्रामक रोग केंद्र में भर्ती 197 मरीजों पर आधारित हैं.
रिसर्च के मुताबिक इस बार मंकीपॉक्स से संक्रमित लोगों में मलाशय में दर्द और शिश्न की सूजन (एडिमा) जैसे लक्षण भी देखे गए हैं जो पिछले प्रकोपों में नहीं देखे गए थे. हालांकि लक्षण पहले जैसे ही हैं. ऐसे में शोधकर्ताओं का सुझाव है कि यदि किसी रोगी में ऐसे लक्षण दिखते हैं तो डॉक्टर मंकीपॉक्स की जांच पर विचार कर सकते हैं. साथ ही उनके अनुसार मंकीपॉक्स से ग्रस्त जिन रोगियों में इस तरह के लक्षण सामने आए हैं उनका किस तरह इलाज किया जाना है इसपर गौर किया जाना जरुरी है.
गौरतलब है कि इस अध्ययन में जिन मरीजों को शामिल किया गया था उनमें से 197 मरीज पुरुष थे, जिनकी औसत आयु 38 वर्ष के आसपास थी. इतना ही नहीं इनमें से 196 समलैंगिक, या पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले थे.
86 फीसदी मरीजों में पूरे शरीर पर मिले थे संक्रमण के निशान
इनमें से ज्यादातर रोगियों में त्वचा या श्लेष्म झिल्ली विशेषतौर पर जननांगों पर घाव पाए गए थे. वहीं करीब 86 फीसदी मरीजों में इस संक्रमण ने पूरे शरीर को अपनी चपेट में लिया था. इसमें सबसे आम लक्षण बुखार था जो 62 फीसदी मामलों में देखा गया था, जबकि 58 फीसदी में सूजी हुई लिम्फ नोड्स और 32 फीसदी ने मांसपेशियों में खिंचाव और दर्द की शिकायत की थी.
विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा मामलों से उलट पिछली रिपोर्टों से पता चला है कि प्रणालीगत लक्षण त्वचा के घावों से पहले सामने आते हैं, जबकि वर्तमान में ऐसा नहीं हुआ है. मौजूदा 38 फीसदी रोगियों में म्यूकोक्यूटेनियस घावों की शुरुआत के बाद सिस्टेमैटिक लक्षण सामने आए थे. जबकि 14 फीसदी मामलों में इन लक्षणों के बिना ही घावों की जानकारी मिली थी.
इनमें से कुल 71 रोगियों ने मलाशय में दर्द, 33 ने गले में खराश और 31 ने शिश्न में सूजन की जानकारी दी है. वहीं 27 मरीजों के मुंह में घाव पाए गए थे. वहीं 9 में टॉन्सिल में सूजन पाई गई, जबकि 22 में केवल एक घाव था.
गौरतलब है कि अकेले घाव और सूजे हुए टॉन्सिल को पहले मंकीपॉक्स संक्रमण की विशिष्ट विशेषताओं के रूप में नहीं जाना जाता था, उनके लिए यह माना जाता था की वो अन्य किसी वजह से होते हैं.
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इनमें से 36 फीसदी मरीजों को एचआईवी संक्रमण था. कुल मिलकर करीब 10 फीसदी मरीजों को आम तौर पर मलाशय में दर्द और शिश्न की सूजन जैसे लक्षणों के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया था. हालांकि इनमें से किसी भी मरीज की मृत्यु की जानकारी सामने नहीं आई है.
प्राप्त जानकारी के मुताबिक इनमें से केवल एक मरीज ने उन क्षेत्रों की यात्रा की थी जहां इन रोगों का प्रकोप था. यह यूके के भीतर इस संक्रमण के प्रसार की पुष्टि करता है. वहीं करीब एक चौथाई रोगी ऐसे थे जो मंकीपॉक्स से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए थे.
प्राप्त जानकारी के मुताबिक इनमें से केवल एक मरीज ने उन क्षेत्रों की यात्रा की थी जहां इन रोगों का प्रकोप था. यह यूके के भीतर इस संक्रमण के प्रसार की पुष्टि करता है. वहीं करीब एक चौथाई रोगी ऐसे थे जो मंकीपॉक्स से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए थे. ऐसे में बहुत कम या बिना लक्षणों वाले संक्रमित लोगों से भी इसके प्रसार की संभावनाएं बढ़ गई हैं यह निष्कर्ष उसकी पुष्टि करते हैं.
20 हजार से ज्यादा मामले आ चुके हैं सामने
गौरतलब है कि वैश्विक स्तर पर इस बीमारी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे 23 जुलाई 2022 को सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदा यानी ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया था. यह बीमारी भारत सहित दुनिया के करीब 78 देशों में फैल चुकी है. सारी दुनिया में अब तक इसके 20 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं समेत संक्रमित लोगों के संपर्क में आने वाले सभी व्यक्तियों के साथ-साथ प्रयोगशाला कर्मचारियों और एक से अधिक लोगों के साथ यौन संबंध बनाने वाले लोगों जिनमें इस संक्रमण के फैलने का जोखिम सबसे ज्यादा है उनके लिए टीकाकरण की सिफारिश की है.
(डाउन टू अर्थ से साभार)
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