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प्रत्युष दीप

गटर में उतरने वालों की आपबीती: “लगता है जैसे नरक में उतर गए हैं”

देश में मैनुअल स्कैवेंजिंग यानी हाथ से मैला उठाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध है. 2013 में आए संशोधित एक्ट के तहत अब कोई भी व्यक्ति अथवा एजेंसी किसी भी व्यक्ति से मैनुअल स्कैवेंजिंग नहीं करा सकते हैं. एक्ट के मुताबिक बिना सेफ्टी किट के अगर कोई सीवर या सेप्टिक टैंक को साफ करता है तो उसे अपराध माना जाएगा. ऐसा करने पर दो साल का कारावास अथवा एक लाख रुपए जुर्माना या दोनों हो सकते हैं. 

हाथ से मैला उठाने का कार्य आज भी जारी है. सख्त कानून लागू होने के 10 साल बाद भी सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के चलते लोगों की मौतें हो रही हैं. 

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बीते चार सालों में देशभर में 233 लोगों की जानें गईं हैं. इनमें से 2022 में देश भर में 48 तो वहीं सिर्फ हरियाणा में 13 लोगों की मौत सेप्टिक टैंक और गटर साफ करने के दौरान हुईं यानी मौतों के मामले में देश में हरियाणा टॉप पर है. इसके बाद सबसे ज्यादा 12 लोगों की मौत महाराष्ट्र में हुई है.

न्यूज़लॉन्ड्री की टीम ने हरियाणा के तीन जिलों रोहतक, झज्जर और फरीदाबाद का दौरा किया. हमने जमीनी सच्चाई जानने की कोशिश की कि आखिर यहां के सीवर सिस्टम कैसे काम करते हैं और क्यों यहां के लोग इसके चलते लगातार अपनी जान गंवा रहे हैं.  

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