
“दिन में तीन बार नशा करता हूं सुबह, दोपहर और शाम. बहुत कोशिश की छोड़ने की लेकिन रोक नहीं पाया” यह कहते हुए 22 साल के गुरप्रीत सिंह अपना हाथ हमें दिखाने लगते है.
न सिर्फ गुरप्रीत बल्कि अमृतसर के मकबूलपुरा इलाके में अधिकतर युवा नशे की चपेट में हैं. आसानी से नशे की पहुंच के कारण इलाके में यह हर दिन बढ़ रहा है. अमृतसर के मकबूलपुरा में रहने वाले 49 वर्षीय जसवीर सिंह कहते हैं, “इलाके के हर घर में नशा है, माता-पिता मजदूरी करते हैं और बच्चे पीठ पीछे नशा.”
हम जिस मकबूलपुरा की बात कर रहे हैं वह पंजाब की सबसे हाई प्रोफाइल सीट अमृतसर पूर्व विधानसभा क्षेत्र में आता है. इस बार मौजूदा विधायक और पंजाब कांग्रेस के प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू के सामने अकाली दल के नेता विक्रम सिंह मजीठिया चुनाव लड़ रहे हैं, जिसके कारण इस सीट की चर्चा हर जगह हो रही है. बेरोजगारी, गरीबी और मूलभूत सुविधाओं से वंचित इस इलाके में कई मुद्दे हैं लेकिन सब कुछ घूम-फिर कर नशे पर ही आ जाता है.
क्या सिर्फ चुनावीं मुद्दा है नशा?
न्यूज़लॉन्ड्री की टीम चुनावी कवरेज के दौरान पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में गई. प्रदेश में कुछ मुद्दे ऐसे थे जो हर जगह लोगों ने उठाए उसमें से एक है नशे का मुद्दा. मकबूलपुरा में भी नशा एक बड़ा मुद्दा है.
गुरप्रीत को तीन साल हो गए नशा करते हुए. एक गैराज में काम कर रहे गुरप्रीत कहते है, पिछली जगह काम करने के दौरान पहली बार नशा किया, जो साथ काम करने वाले एक सहयोगी ने दिया था. खून लगे टीशर्ट को ऊपर कर अपने हाथ की नश को दिखाते हुए वह कहते हैं, “मैंने सुबह ही ड्रग लिया, एक बार दिन में लूंगा और फिर एक बार सोने से पहले.”

गुरप्रीत जैसे युवाओं के लिए विधानसभा चुनाव से कोई उम्मीद नहीं है. वह कहते हैं कि चुनावों में कई वादे किए जाते हैं लेकिन जमीन पर कुछ नहीं होता.
वह याद करके बताते हैं, ”पिछली बार, कैप्टन अमरिंदर सिंह यहां आए और कहा कि नशाखोरी खत्म कर देगें और हमें नौकरी और स्मार्टफोन देंगे. लेकिन कुछ नहीं हुआ. इसलिए इस चुनाव के बाद यहां सब कुछ पहले जैसा ही हो जाएगा.”
नशाखोरी को लेकर न सिर्फ गुरप्रीत बल्कि कांग्रेस पार्टी के स्थानीय पार्षद 63 वर्षीय कश्मीर सिंह भी यही बात कहते हैं, ”यह एक मुद्दा ऐसा है जो कोई भी सरकार दूर नहीं कर सकती, भले ही मेरी पार्टी क्यों न जीत जाए. नशेड़ी नशा पाने के लिए कुछ भी करते हैं.”
मिस्त्री का काम करने वाले जसवीर सिंह कहते है, आसानी से नशा मिलने की वजह से नौजवान मौत के मुंह में जा रहे हैं. “गली में मौजूद हर घर में एक बच्चा नशा कर रहा है. इन सबसे पुलिस वाले भी मिले हुए हैं. ऊपर से कोई कुछ बोले या करे तब यह समस्या दूर होगी.”

गुरप्रीत कहते हैं, “इस इलाके में सभी युवकों की एक ही कहानी है. यहां गली-गली में नशा मिलता है. जब नशा नहीं मिलता तो हिंसक हो जाते हैं.”
क्या कहते हैं आंकड़े
एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक साल 2019 में पंजाब में नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 के तहत 6909 मामले दर्ज हुए हैं. वहीं 759 किलो हेरोइन ड्रग की रिकवरी की गई. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) द्वारा 2015 के एक सर्वे में पाया गया कि पंजाब में 18-35 आयु वर्ग के 100 में से 15 वयस्क ड्रग का उपयोग करते थे, जबकि 100 में से 4 को ड्रग की लत थी. वहीं साल 2010 में इंस्टीट्यूट फॉर डेवलपमेंट एंड कम्युनिकेशंस, चंडीगढ़ के एक अध्ययन में बताया गया था कि राज्य के सीमावर्ती जिलों में 76 प्रतिशत लोग जो ड्रग का सेवन करते है वह 15-35 आयु वर्ग में आते हैं.
साल 2020 में आई केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में कुल 272 जिले नशे की गिरफ्त में हैं जिसमें से 18 जिले पंजाब के हैं. यानी राज्य के कुल 22 जिलों में से 18 जिले नशे की चपेट में हैं.
कांग्रेस पार्टी ने साल 2017 चुनावों में नशाखोरी खत्म करने की बात कही थी. पार्टी ने कहा था सरकार बनते ही चार हफ्तों में नशा खत्म कर देंगे. लेकिन सरकार के पांच साल पूरा हो जाने के बाद भी यह वादा पूरा नहीं हो पाया है.
कांग्रेस सरकार ने दिसंबर 2021 को शिरोमणि अकाली दल के नेता विक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ ड्रग मामले को लेकर एफआईआर दर्ज की थी. जिसके बाद सुखबीर सिंह बादल ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि ड्रग्स तस्करी के झूठे मामले में केस दर्ज करवा कर विक्रम सिंह मजीठिया को गिरफ्तार करने के लिए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पंजाब पुलिस पर दबाव बना रहे हैं.
हर घर की एक ही कहानी
52 साल के जंग बादल का घर भी नशे से दूर नहीं है. उनके 24 साल के बेटे अजय को ड्रग की लत है. जंग बादल मकबूलपुरा में रेस्तरां को तंदूर देते हैं, जिससे हर दिन वह एक हजार रुपए कमा लेते हैं. लेकिन इसका लगभग आधा हिस्सा उनके बेटे के नशे में चला जाता है.
वह कहते हैं, “अगर उसे ड्रग्स नहीं मिलती है तो वह चिल्लाता है, रोता है. घर से सामान ले जाकर बेच देता है. मैंने उसके लिए लगभग 10 मोबाइल फोन खरीदे लेकिन उसने ड्रग खरीदने के लिए बेच दिए. मैं और क्या कर सकता हूं.”

बादल कहते हैं कि उनके बेटे को 15 साल की उम्र में नशे की लत लग गई थी. लेकिन उन्हें इसके बारे में तीन साल बाद पता चला. आसपास के लड़के मेरे पास आते थे और कहते थे कि आपका बेटा ड्रग्स लेता है लेकिन मैं विश्वास नहीं करता था. लेकिन एक दिन मैंने उसे एक खेत में हाथ में इंजेक्शन के जरिए नशा करते हुए देखा.”
बादल अपने बेटे की नशे की लत की वजह से टूट चुके हैं और उन्होंने अब उम्मीद भी छोड़ दी है. वह कहते है, “पुनर्वास केंद्र में भी बेटा रहा लेकिन जब वह वहां से आया तो और ज्यादा नशा करने लगा. मुझे पता है कि वह एक दिन मर जाएगा, इसलिए हम उसकी शादी नहीं कर रहे हैं. वह खुद की तो देखभाल कर नहीं पा रहा है तो अपने परिवार को कैसे खिलाएगा?”
जंग बादल की तरह ही 53 साल के सुखराज सिंह के बेटे को भी नशे की लत है. 18 साल का उनका बेटा रघु, 15 साल की उम्र से ड्रग्स ले रहा है. सुखराज ऑटो रिक्शा चलाते हैं. दिनभर में करीब 300-400 कमा लेते हैं. वह कहते हैं, “सारा पैसा बेटे के नशे में खर्च हो जाता है.”

मकबूलपुरा में ड्रग (जिसे चिट्टा कहते हैं) वह 300 से लेकर 500 रुपए तक में मिलता है. सुखराज कहते हैं, “उनकी पत्नी भी फैक्ट्री में काम करती है लेकिन बेटा कुछ नहीं करता. नशे के कारण उसे कोई नौकरी भी नहीं देता.”
रघु को एक महीने पहले ही पुलिस ने ड्रग्स लेने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. सुखराज कहते हैं, “अच्छा हुआ पुलिस पकड़कर ले गई, यहां रहता तो हमें ही परेशान करता. कितने साल जेल में रहेगा हमें नहीं पता.”
नशे में हिंसक होकर मारपीट करने और पैसे न होने पर घर का सामान बेचने की कहानी सुखराज के घर भी है. वह कहते हैं, ”पैसे नहीं देने पर घर का सामान बेचकर नशा करता था. मना करने पर कहता था कि नहीं करूंगा लेकिन घर से बाहर जाता था तो फिर नशा कर लेता था.”
गुरप्रीत भी कहते हैं, ”ड्रग की लत के कारण कई बार घर का सामान बेच दिया. जब मेरी मां पैसे देने से मना कर देती थी तब मैं उनके साथ हिंसक हो जाता था. जानता हूं गलत है, लेकिन क्या करूं?”
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