
बीते रविवार को उत्तर प्रदेश के तमाम अखबारों में यह खबर छपी कि प्रदेश में ऑक्सीजन, बेड और दवाइयों की कोई कमी नहीं है. यह खबर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संपादकों की एक वर्चुअल बैठक के बाद सामने आई थी. जिसमें उपरोक्त सभी दावे किये गए थे. हालांकि न्यूज़लॉन्ड्री ने पाया कि यह दावे निराधार हैं.
27 अप्रैल यानी मंगलवार को न्यूज़लॉन्ड्री की टीम गाजियाबाद में मौजूद थी. यहां के इंदिरापुरम में एक गुरुद्वारे द्वारा ऑक्सीजन लंगर चलाया जा रहा है. यहां सुबह से ही लोगों की भीड़ जमा थी. मरीजों के परिजन अलग-अलग अस्पतालों में भटकने के बाद यहां ऑक्सीजन की तलाश में पहुंच रहे थे, लेकिन यहां भी देर शाम तक किसी को ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिला.
यहां हमारी मुलाकात गाजियाबाद के वैशाली से आए रामचंद्र सिंह से हुई. बुजुर्ग रामचंद्र सिंह को उनके बेटे लेकर आए थे. ऑक्सीजन के इंतजार में वे गाड़ी में बैठे हुए थे और नारियल पानी पी रहे थे. तभी गिर गए. वहां मौजूद डॉक्टर ने कहा कि इन्हें अस्पताल लेकर जाइये. उनके अस्पताल लेकर जाने के बाद डॉक्टर ने कहा यह मर गए हैं.
रामचंद्र सिंह के बेटे ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया, "मैं चार दिनों से अलग-अलग अस्पतालों में अपने पिता को लेकर घूम रहा हूं. लेकिन किसी ने भर्ती नहीं किया." यह कहने के बाद वे रोने लगते हैं.
न्यूज़लॉन्ड्री की टीम गाजियाबाद के राजकीय जिला अस्पताल में पहुंची. वहां हालत यह है कि लोगों का कोविड टेस्ट तक भी नहीं हो पा रहा है. लोग सुबह 7:00 बजे से लाइन में लगे और दोपहर 2:00 बजे तक लाइन में खड़े रहे और आखिर में अस्पताल प्रशासन ने कह दिया, "टेस्ट करने का साधन हमारे पास मौजूद नहीं है. आप लोग कल आइएगा."
यहां हमारी मुलाकात मुरादनगर विधानसभा के आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष अजय पारचा से हुई. अजय अपने मौसा यशपाल को लेकर भटक रहे थे. जिला अस्पताल में उनके मौसा को किसी ने नहीं देखा. दिनभर भटकने के बाद शाम 5:00 बजे के करीब उनका निधन हो गया.
गाजियाबाद के अलग-अलग इलाकों में घूमने के बाद न्यूज़लॉन्ड्री ने पाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह दावा बिल्कुल ही गलत है कि प्रदेश में ऑक्सीजन और बेड की कोई कमी नहीं है.
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