
सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने अपने बहुमत के फैसले में ईडब्ल्यूएस आरक्षण को वैध माना है. इसके साथ ही केंद्र सरकार द्वारा सामान्य वर्ग के लिए आर्थिक तौर पर दिए गए आरक्षण पर कोर्ट ने कहा कि यह संविधान के मूलभूत सिद्धांत और भावना का उल्लंघन नहीं करता है.
इस फैसले के बाद से सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर भी बहस छिड़ गई है जिसके मुताबिक देश में 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण नहीं हो सकता.
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के पक्ष और विपक्ष में लोगों ने अपने-अपने तर्क दिए हैं. जिसके बाद माना जा रहा है कि यह फैसला आगे के लिए सरकार की राह को चुनौतीपूर्ण कर देगा.
देखिए सारांश का यह एपिसोड और जानिए क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला, 103वां संविधान संशोधन अधिनियम क्या है और फैसले के पक्ष और विपक्ष में लोगों के तर्क.
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