
गरीबों को मिल रहे राशन वितरण में हो रही धांधली पर खबर करने को लेकर नवभारत ऑनलाइन के पत्रकार विश्व गौरव और आशीष सुमित वर्मा के खिलाफ लखनऊ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है.
@NBTLucknow डिजिटल के पत्रकार @vishvagaurav और @sumitmshr ने गरीबों को मिलने वाले अनाज में धांधली को कवरेज की तो लखनऊ पुलिस ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। @myogiadityanath जी बताईये कि क्या यूपी में पत्रकारिता करना अपराध बन चुका है ?
— Ayush Jain (@Ayush_journo) September 13, 2021
पत्रकारों के खिलाफ मार्केटिंग इंस्पेक्टर शशि सिंह ने यह केस दर्ज कराया है. शिकायत में कहा गया है कि पत्रकारों ने सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई साथ ही मारपीट भी की.
केस दर्ज होने के बाद पत्रकार आशीष सुमित ने ट्वीट कर कहा, “सच दिखाने की कोशिशों पर 'पहरा', लखनऊ के डरे अधिकारियों ने दर्ज कराई NBT पत्रकारों पर FIR, लापरवाह अब भी कुर्सी पर जमे.”
सच दिखाने की कोशिशों पर 'पहरा', लखनऊ के डरे अधिकारियों ने दर्ज कराई NBT पत्रकारों पर FIR, लापरवाह अब भी कुर्सी पर जमे@vishvagauravhttps://t.co/FkgP2X4Fhg https://t.co/FDI1oRk9Cg
— Ashish Sumit Mishra (@sumitmshr) September 13, 2021
वहीं पत्रकार विश्व गौरव ने लिखा, “आप कराइए FIR, हम इन धमकियों से नहीं डरते, क्योंकि हमारी जवाबदेही जनता के प्रति है, कुर्सी के अहंकार में चूर लोगों के प्रति नहीं...
हम लिखेंगे,बोलेंगे और लगातार अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे…”
आप कराइए FIR, हम इन धमकियों से नहीं डरते, क्योंकि हमारी जवाबदेही जनता के प्रति है, कुर्सी के अहंकार में चूर लोगों के प्रति नहीं...
— विश्व गौरव Vishva Gaurav (@vishvagaurav) September 12, 2021
हम लिखेंगे,बोलेंगे और लगातार अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे...@Journoaatmiya @sumitmshr @AdminLKO @myogiadityanath @myogioffice pic.twitter.com/H7GoF3LZ98
दोनों पत्रकारों के खिलाफ जिस रिपोर्ट को लेकर केस दर्ज किया गया है, वह खबर एनबीटी की वेबसाइट पर 12 सिंतबर यानी रविवार को प्रकाशित की गई है.
इस खबर में बताया गया है कि लखनऊ के तालकटोरा थाना क्षेत्र स्थित बावली चौकी इलाके में मौजूद सरकारी राशन गोदाम अधिकारियों के भरोसे नहीं बल्कि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है. मार्केटिंग अधिकारी घर पर बैठे हैं और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के भरोसे राशन गोदाम चलाया जा रहा है.
बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब पत्रकारों पर केस दर्ज किया गया है. उत्तर प्रदेश में पत्रकारों के खिलाफ दर्ज होने वाले मामलों की एक पूरी टाइमलाइन है जिसकी शुरुआत साल 2017 में हुई थी.
यूपी में पत्रकारों के ऊपर हमले और मुकदमे की धमकियां बढ़ गई है, जिसे आप न्यूज़लॉन्ड्री पर पढ़ सकते हैं.
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