
सुप्रीम कोर्ट ने ‘द वायर’ और उसके पत्रकारों के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज मामले में कार्रवाई पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने पत्रकारों की गिरफ्तारी से दो महीने की राहत दी है.
फाउंडेशन ऑफ इंडिपेंडेंट जर्नलिज्म द्वारा दायर याचिका पर जस्टिस एल नागेश्वर रॉव, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच सुनवाई कर रही थी. बेंच ने कहा, “हम नहीं चाहते कि प्रेस की स्वतंत्रता का हनन हो. हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के महत्व को समझते हैं.”
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हम नहीं चाहते कि प्रेस का गला दबाया जाए. लेकिन एफआईआर रद्द करने के लिए याची हाईकोर्ट जाएं.”
याचिका में गाजियाबाद, लोनी और बाराबंकी में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई थी.
याचिका में कहा गया है कि उनके खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्रवाई में कानून की जरूरी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया है.
राज्य के इस तरह के कृत्य न केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बल्कि कानून के शासन के लिए भी सीधा खतरा हैं. यह मीडिया पुलिसिंग है, और इसलिए इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की जरुरत है.
बता दें कि लोनी में एक मुस्लिम व्यक्ति पर हमले से जुड़े ट्वीट्स को आधार बनाकर द वायर पर केस दर्ज किया था. इसी तरह बाराबंकी में एक वीडियो रिपोर्ट को लेकर मामला दर्ज किया गया था.
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