
देशभर में कोरोना के प्रकोप से कोई प्रदेश अछूता नहीं है. जहां देखो वहां लोग ऑक्सीजन के लिए, बेड के लिए, रेडेमसिविर इंजेक्शन के लिए लाइन लगाए हुए हैं. लेकिन उत्तर प्रदेश इस मामले में अलहदा है. यहां हालात खराब होने के बावजूद राज्य के मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि प्रदेश में सब ठीक है.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पत्रकारों के साथ हुई बातचीत में कहते हैं कि राज्य में ऑक्सीजन, बेड और रेडेमसिविर इंजेक्शन की कोई कमी नहीं है. अधिकारियों से बैठक में कहते हैं कि जो अस्पताल ऑक्सीजन की कमी को लेकर मीडिया में बयान जारी करे या मरीजों को कहीं और शिफ्ट करने के लिए कहें उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करें.
मुख्यमंत्री एक ओर पूरी कोशिश कर रहे हैं कि मीडिया प्रदेश सरकार की नाकामियों को ना दिखा पाए. लेकिन सरकार के बदइंतजामी की पोल सुप्रीम कोर्ट में खुद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने खोल दी.
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में पत्रकार सिद्दीकी कप्पन के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार का पक्ष रखते हुए कप्पन को जमानत ना देने की बात कही. साथ ही दिल्ली ट्रांसफर करने की बात का विरोध करते हुए कहा कि मथुरा में ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें बेड नहीं मिल पा रहा है.
SG: In Mathura, there are several people who are not getting beds.
— Live Law (@LiveLawIndia) April 28, 2021
CJI: We are not. Please listen. We are not stopping you.
SG: I am appearing in matters pertaining to insufficiency of beds and I am also being approached by large number of people.
वह कहते है, “मैं व्यक्तिगत ऐसे बहुत से पत्रकारों को जानता हूं जिन्हें अस्पताल में बेड नहीं मिल पा रहा है. बहुत मुश्किल के बाद एक बेड मिला.”
SG: In UP also, huge people are not getting beds. I personally know huge, bonafide journalists who are not getting beds. With much difficulty, we got a bed. This is a man who is refusing to go to the relevant court. He is adamant in fighting with this association.
— Live Law (@LiveLawIndia) April 28, 2021
कोर्ट में तुषार मेहता ने पत्रकार सिद्दीकी कप्पन को विशेष रूप से इलाज के लिए दिल्ली भेजने का विरोध किया. उन्होंने विरोध करते समय जो दलीलें दी उससे उत्तर प्रदेश सरकार का वह झूठ बेपर्दा हो गया जो मुख्यमंत्री पत्रकारों और अधिकारी को बोल रहे थे.
सरकार ने अपनी कमियों पर काम करने की बजाय अब उन लोगों पर केस दर्ज करना शुरू कर दिया है जो प्रदेश में ऑक्सीजन, बेड या इंजेक्शन की कमी को लेकर लोगों की मदद करने के लिए ट्वीट कर रहे हैं.
FIR filed against man who sought Twitter help for oxygen for grandfather in UPhttps://t.co/AuAMCS7kJL
— scroll.in (@scroll_in) April 28, 2021
स्क्रॉल की खबर के मुताबिक, एक व्यक्ति के खिलाफ इसलिए केस दर्ज कर लिया गया क्योंकि उसने अपने दादा के लिए ट्विटर पर ऑक्सीजन के लिए मदद मांगी थी.
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