
पिछले हफ्ते यूरोपीय संघ के एक नॉन-प्रॉफिट समूह ईयू-डिसइन्फोलैब ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया कि भारतीय समाचार एजेंसी एएनआई ऐसे स्रोतों के हवाले से खबरें चलाती है जो अस्तित्व में ही नहीं हैं. इस हफ्ते इस पर विशेष टिप्पणी.
लगे हाथ इस हफ्ते आप लोगों के लिए टिप्पणी एक कहानी जिसका शीर्षक है साहसी राजा. बहुत पुरानी बात है. आर्यावर्त में एक बहुत साहसी राजा हुआ. राजा परले दरजे का साहसी था. उसकी वीरता और साहस की कहानियां पूरी दुनिया में फैली हुई थी. इस पूरी कहानी को ध्यान से सुनिए.
इसके अलावा टिप्पणी में खास टिप्पणी उन खबरिया चैनलों पर जो “राष्ट्र संकट में है” परियोजना को आगे बढ़ाने में लगे रहे, बहाना कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और आप नेता मनीष सिसोदिया बने. खेड़ा के ऊपर आरोप लगा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिताजी के नाम से खिलवाड़ किया.
इसके अलावा कहानी सोनू, मोनू, बिट्टू, पिंकी, सिंटू, मिंटू आदि तमाम गौरक्षकों की जिनके समर्थन में हरियाणा में महापंचायत का आयोजन किया. महापंचायतों में ऐलान किया गया कि अगर सोनू, मोनू, बिट्टू, पिंकी, सिंटू, मिंटू को कुछ हुआ तो देश में आग लगा देंगे.
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