
सुल्तानपुरी वार्ड में पहुंचते ही जैसे ही आप वहां की ट्रांसजेंडर प्रत्याशी के बारे में पूछते हैं, एक स्थानीय ई-रिक्शा चालक वहां के एक मात्र किन्नरों के मंदिर पर जाने की सलाह देते हैं. मान्यता है की यहां मांगी हर मुराद पूरी होती है. पास ही की दीवार पर लगे आम आदमी पार्टी के चुनावी पोस्टर में उमीदवार बॉबी, वोटों की अपील ऐसे करते हुए दिखाई पड़ती हैं, मानो अपने मन की मुराद मांग रही हो.
बॉबी पिछली बार, 2017 में, एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ी थीं. वहीं इस बार उन्होंने आम आदमी पार्टी के बैनर तले चुनावी मैदान में उतरने का निर्णय लिया है. न्यूज़लॉन्ड्री से बातचीत में बॉबी ने बताया, "मैं लोगों की सेवा का काम करती रही हूं, यहां के लोगों ने ही बोला है कि अगर पावर हाथ में आ जाये तो और काम कर पाऊंगी.”
बिहार की रहने वाली एक स्थानीय निवासी और आम आदमी पार्टी समर्थक बताती हैं, "पिछले 20 सालों से दीदी ने हमारी बहुत मदद की".
वैसे लोकल स्तर पर बॉबी की साख के अलावा भी कुछ फैक्टर हैं, जो आम आदमी पार्टी के पक्ष में होते दिखाई पड़ते हैं. एक गली में जाते ही जहां ज्यादातर लोग वाल्मीकि समुदाय के रहने वाले हैं, आपको पता चलता है, कैसे सालों से एमसीडी में काम करने वाले सफाई कर्मचारी समय पर तनख्वा न मिलने से नाराज हैं. क्या भाजपा को इस आक्रोश का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है? जानने के लिए देखिये सुल्तानपुरी से ये ग्राउंड रिपोर्ट-
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