
वरिष्ठ पत्रकार परंजय गुहा ठाकुरता ने पेगासस जासूसी की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. याचिका में कहा गया है कि सरकारी एजेंसियों द्वारा निगरानी के अनधिकृत उपयोग ने संविधान के तहत गारंटीकृत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया है.
वरिष्ठ पत्रकार के साथ स्वतंत्र पत्रकार रूपेश कुमार सिंह, एसएनएम आब्दी, प्रेम शंकर झा और इप्सा शताक्षी भी कोर्ट पहुंचे हैं. इन सभी का नाम पेगासस संभावित जासूसी की लिस्ट में आया था.
याचिका में कहा गया है, सरकार को भारतीय नागरिकों को साइबर हथियार और पेगासस जैसे मैलवेयर के इस्तेमाल से बचाने के लिए उपयुक्त कदम उठाने का निर्देश जारी करे.
साथ ही भारत सरकार से निजता के अवैध उल्लंघन और हैकिंग की किसी भी शिकायत से निपटने के लिए न्यायिक निगरानी तंत्र स्थापित करने और ऐसे उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार सभी सरकारी अधिकारियों को दंडित करने का निर्देश देने की भी मांग की.
गुहा ने अपनी याचिका में कहा है कि, “भारत में उन पर और अन्य पत्रकारों पर पेगासस के हमले से गोपनीय मुखबिरों और व्हिसलब्लोअर्स को आगे आने और सरकार के विभिन्न स्तरों पर गलत कामों को सामने लाने से रोक दिया जाएगा और इस तरह, पूरे शासन में पारदर्शिता पर गलत प्रभाव पड़ेगा.”
पेगासस विवाद पर शीर्ष अदालत का रुख करने वाले परंजय गुहा ठाकुरता पहले "पीड़ित व्यक्ति" हैं, जिनके निजी फोन को निगरानी में रखा गया था.
बता दें कि इससे पहले पेगासस जासूसी जांच के लिए तीन अलग-अलग याचिकाएं कोर्ट में दाखिल की जा चुकी हैं. हाल ही में वरिष्ठ पत्रकार एन राम और शशि कुमार ने जांच के लिए याचिका दाखिल की है. उनसे पहलेवकील एमएल शर्मा और सीपीएम के राज्यसभा सांसद जान ब्रिटास कोर्ट में याचिका दायर कर चुके हैं. सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर 5 अगस्त को सुनवाई करेगी.
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