
दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को इंडिया टुडे और आज तक की मालिक कंपनी टीवी टुडे नेटवर्क को ऑनलाइन पोर्टल न्यूज़लॉन्ड्री के खिलाफ मानहानि और कॉपीराइट उल्लंघन के मुकदमे में किसी भी कार्रवाई से इंकार कर दिया. जस्टिस आशा मेनन ने न्यूज़लॉन्ड्री को इंडिया टुडे और आज तक की क्लिप वाले वीडियो को यूट्यूब से हटाने का निर्देश देने से भी इंकार कर दिया है.
जस्टिस मेनन ने कहा कि टीवी टुडे नेटवर्क के पास न्यूज़लॉन्ड्री के खिलाफ कोई कोई पुख़्ता सबूत नहीं है, और न ही चैनल की छवि को कोई बड़ा नुकसान हुआ है. ऐसे में न्यूज़लॉन्ड्री पर कार्रवाई नहीं की जा सकती है. कोर्ट ने कहा की इस विवाद को व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा के रूप में लेना चाहिए, कॉपीराइट के बजाय प्रसारण अधिकारों के तहत चर्चा की जानी चाहिए.
#Breaking Delhi High Court has refused to grant interim relief to TV Today network and refused to direct Newslaundry to take down its allegedly infringing videos containing clips of India Today and Aaj Tak.#DelhiHighCourt @newslaundry @IndiaToday pic.twitter.com/9WLzXQFrxf
— Bar & Bench (@barandbench) July 29, 2022
टीवी टुडे नेटवर्क ने अक्टूबर 2021 में मानहानि, व्यावसायिक अपमान और कॉपीराइट उल्लंघन का आरोप लगाते हुए न्यूज़लॉन्ड्री और इसके संस्थापक-निदेशकों के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था. टीवी टुडे के चैनलों ने इससे पहले 50 से अधिक कॉपीराइट स्ट्राइक और दावे न्यूज़लॉन्ड्री के खिलाफ भेजे थे, जिससे हमारा (न्यूज़लॉन्ड्री) यूट्यूब चैनल कुछ समय के लिए सस्पेंड हो गया था.
टीवी टुडे ने अपने अंतरिम आवेदन में कथित रूप से उल्लंघन करने वाले वीडियो को हटाने और वेबसाइट और उसके यूट्यूब चैनल के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश देने को कहा था. साथ ही चैनल पर दो करोड़ के जुर्माने की मांग की थी.
टीवी टुडे की ओर से पेश वकील हृषिकेश बरुआ ने कहा कि न्यूज़लॉन्ड्री के शो उनकी (टीवी टुडे की) सामग्री पर निर्भर थे. उन्होंने हमारे वीडियो का एक मिनट से अधिक समय तक इस्तेमाल किया है, जबकि उनकी अपनी टिप्पणी मुश्किल से पांच या छह सेकेंड की है.
इसके जवाब में न्यूज़लॉन्ड्री की तरफ से कहा गया कि वीडियो को गलत रूप देकर पेश किया गया है. हम मीडिया पर रिपोर्ट और उसकी आलोचना करने वाला संस्थान हैं. न्यूज़लॉन्ड्री ने टीवी टुडे नेटवर्क पर आरोप लगते हुए कहा कि वे हर किसी की आलोचना करना चाहते हैं और चाहते हैं कि उनके द्वारा की गयी आलोचना पर कोई प्रतिक्रिया न दे, लेकिन जब हम उनकी आलोचना करते हैं तो यह उन्हें बर्दाश्त नहीं हो रहा है.
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