
केंद्र सरकार ने पेगासस जासूसी मामले पर हलफनामा दाखिल करने से इंकार कर दिया है. सरकार ने कहा कि यह सार्वजनिक चर्चा का विषय नहीं है. इसलिए हलफनामा दाखिल नहीं कर सकते. लेकिन वह जासूसी के आरोपों की जांच के लिए पैनल गठित करने के लिए राजी है.
सीजेआई एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एएस बोपन्ना की बेंच ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से नाराजगी जताई. सीजेआई ने कहा कि आप बार-बार उसी बात पर वापस जा रहे हैं. हम जानना चाहते हैं कि सरकार क्या कर रही है. हम राष्ट्रीय हित के मुद्दों में नहीं जा रहे हैं. हमारी सीमित चिंता लोगों के बारे में है.
CJI : Appointing a committee or making inquiry is not the question here. If you file an affidavit then we know where you stand. #SupremeCourt #Pegasus
— Live Law (@LiveLawIndia) September 13, 2021
सीजेआई ने आगे कहा कि हमने केंद्र को हलफनामे के लिए बार-बार मौका दिया. अब हमारे पास आदेश जारी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है.समिति नियुक्त करना या जांच करना यहां सवाल नहीं है अगर आप हलफनामा दाखिल करते हैं तो हमे पता चलेगा कि आपका स्टैंड क्या है.
CJI : We thought the Government will file a counter-affidavit and will decide further course of action. Now the only issue to be considered is the interim orders to be passed.#SupremeCourt #Pegasus
— Live Law (@LiveLawIndia) September 13, 2021
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार, निगरानी के बारे में सभी तथ्यों को एक विशेषज्ञ तकनीकी समिति के समक्ष रखने के लिए तैयार है, जो अदालत को एक रिपोर्ट दे सकती है. अगर सरकार हलफनामा दायर करेगी तो आतंकवादी या राष्ट्रविरोधी ताकतें इसका गलत इस्तेमाल करेंगी. आशंका है कि आतंकी इसे मॉडिफाई कर ट्रैकिंग से बच जाएंगे.
SG : The stand of the Central Government is that whether a particular software was used or not cannot be a subject matter of an affidavit or debate in court or public discourse. Because the issue has its own pitfalls.#SupremeCourt #Pegasus
— Live Law (@LiveLawIndia) September 13, 2021
बता दें कि अदालत एमएल शर्मा, माकपा सांसद जॉन ब्रिटास, पत्रकार एन राम, पूर्व आईआईएम प्रोफेसर जगदीप चोककर, नरेंद्र मिश्रा, परंजॉय गुहा ठाकुरता, रूपेश कुमार सिंह, एसएनएम आब्दी, पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा और एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया सहित 12 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है.
Also Read: पत्रकार राणा अय्यूब पर चंदे के रुपयों का गबन और धोखाधड़ी का मामला दर्ज
Also Read: मुजफ्फरनगर महापंचायत: आखिर मीडिया के बड़े हिस्से से क्यों नाराज हैं किसान?
Newslaundry is a reader-supported, ad-free, independent news outlet based out of New Delhi. Support their journalism, here.