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अश्वनी कुमार सिंह

सहारनपुर पुलिस हिंसा वीडियो: रवीश कुमार के शो पर यूट्यूब ने लगाया ‘अलर्ट नोटिफिकेशन’

भारतीय जनता पार्टी की पूर्व प्रवक्ता नुपुर शर्मा द्वारा पैगंबर मोहम्मद को लेकर की गई असभ्य टिप्पणी के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन और हिंसा की घटनाएं हुईं. इसके बाद उत्तर प्रदेश प्रशासन ने कथित तौर पर हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की और कई लोगों के घरों पर बुलडोजर भी चलाया.

पुलिस की कार्रवाई का एक वीडियो सहारनपुर जिले से सामने आया. इसे भाजपा विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने शेयर किया. इसमें पुलिस कुछ युवाओं को बेरहमी से पीटती दिखाई दे रही है. त्रिपाठी ने ट्वीट में लिखा, ‘बलवाइयों को “रिटर्न गिफ़्ट”!!’

जब यह वीडियो वायरल हो गया तो लोगों ने यह जानने की कोशिश की कि यह वीडियो कहां का है. लोगों ने सोशिल मीडिया पर भी इस वीडियो से संबंधित सवालों की बौछार कर दी. हालांकि सहारनपुर पुलिस ने कहा यह वीडियो उनके जिले का नहीं है. इसके बाद एनडीटीवी के रिपोर्टर ने सहारनपुर जाकर वीडियो में यातना के शिकार सभी युवाओं से बातचीत की और स्थापित किया कि वायरल वीडियो सहारनपुर के कोतवाली का है.

एनडीटीवी पर रवीश कुमार के कार्यक्रम प्राइम टाइम में यह वीडियो 14 जून को दिखाया गया. शीर्षक था, ”देह पर लाठी, घर पर बुलडोजर”. करीब 33 मिनट के इस एपिसोड में सहारनपुर में युवाओं के साथ पुलिस की मारपीट, बुलडोजर से घर गिराने, गाजियाबाद में हिंदू संगठनों के विरोध प्रदर्शन और महाराष्ट्र में शरद पवार के खिलाफ ट्वीट करने वाले युवाओं के बारे में बताया गया है.

प्राइम टाइम शो की शुरुआत पुलिस द्वारा युवाओं को मारने वाले दृश्य से होती है. इसके बाद वीडियो में उत्तर प्रदेश और अमेरिका में पुलिस के बीच के अंतर को दिखाया गया है.

अब इस वीडियो पर क्लिक करने से यूट्यूब की तरफ से एक चेतावनी संदेश आता है. अंग्रेजी में लिखा संदेश बताता है, ”यह कंटेंट यूट्यूब कम्युनिटी के द्वारा, कुछ दर्शकों के लिए अनुपयुक्त या आपत्तिजनक के रूप में चिन्हित किया गया है”

न्यूज़लॉन्ड्री से बात करते हुए रवीश कुमार कहते हैं, “इस एपिसोड पर एनडीटीवी इंडिया के चैनल पर यूट्यूब ने अलर्ट नोटिफिकेशन लगा दिया, वहीं अंग्रेजी चैनल (एनडीटीवी) पर अपलोड वीडियो पर कोई रोक नहीं है.”

रवीश ने यूट्यूब के इस नोटिफिकेशन के बारे में अपने फेसबुक पेज पर भी लिखा है. वह कहते हैं कि शो के अगले दिन, हमें वीडियो पर इस तरह दिखाए जा रहे अलर्ट नोटिफिकेशन के बारे में पता चला.

वह आगे कहते हैं कि राज्य द्वारा की जा रही हिंसा के वीडियो को दिखाए जाने पर इस तरह का नोटिस? यूट्यूब की पॉलिसी क्या है इसको लेकर स्पष्टता होनी चाहिए, क्योंकि कंपनी इस तरह के नोटिफिकेशन दिखाने से पहले कोई चेतावनी भी नहीं देती है.

वीडियो देखने के समय जो संदेश आ रहा है, उसमें यूट्यूब द्वारा इस वीडियो को अनुपयुक्त या आपत्तिजनक के रूप में चिन्हित किया गया है. इस सवाल पर रवीश कहते हैं, “यूट्यूब कम्युनिटी के नियमों को लेकर गूगल को पारदर्शिता बरतनी चाहिए. क्योंकि अगर ऐसा ही चलता रहा तो 10 हजार आईटी सेल के लोग हर वीडियो पर इस तरह की शिकायत करने लगेंगे.”

वीडियो को लेकर की गई कार्रवाई पर यूट्यूब प्रवक्ता ने कहा, "हिंसक या नृशंस सामग्री को लेकर यूट्यूब के सख्त नियम हैं, जो ऐसे कंटेंट को प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंधित करते हैं. हालांकि वीडियो का संदर्भ मायने रखता है और यदि पर्याप्त शैक्षिक, वृत्तचित्र, वैज्ञानिक और कलात्मक संदर्भ है, तो हम वीडियो को हटाने के बजाय उसे आयु-प्रतिबंधित कर देते हैं."

बता दें कि प्राइम टाइम के इस एपिसोड से पहले और बाद के सभी वीडियो, उन पर दिख रही संख्या के अनुसार लाखो-करोड़ों बार देखे गए हैं. लेकिन इस वीडियो पर प्रदर्शित नंबर 9.23 लाख ही है.

ऐसा नहीं है कि पुलिस हिंसा के वीडियो को सिर्फ एनडीटीवी ने ही दिखाया है बल्कि कई अन्य चैनलों ने भी इसे अपने-अपने प्लेटफार्म पर प्रसारित किया है. इंडिया टुडे, हिंदुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया, मोजो, एनएफएफ यूट्यूब चैनल, लाइव हिंदुस्तान, न्यूज़ क्लिक और एबीपी न्यूज - इन सभी के यूट्यूब चैनलों पर यह वीडियो मौजूद है. इन सब वीडियो को भी लाखों बार देखा गया है लेकिन इनमें से किसी भी वीडियो पर अलर्ट नोटिफिकेशन नहीं आ रहा है.

हालांकि यूट्यूब की गाइडलाइन्स के मुताबिक किसी भी कंटेंट को हटाने या आयु प्रतिबंधित करने से पहले प्लेटफार्म जनहित का ध्यान रखता है. चाहे वह किसी भी चैनल से अपलोड हुआ हो, कंपनी के नियम सभी पर एक समान लागू होते है.

यूट्यूब के पूरे जवाब को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

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