
31 जुलाई को नूंह से शुरू हुई सांप्रदायिक हिंसा की आग ने गुरुग्राम तक और ज्यादा विकराल रूप ले लिया. 1 अगस्त को गुरुग्राम में देर रात तक आगजनी, पथराव, समुदाय विशेष के दुकानों में तोड़फोड़ और मारपीट जारी रही. जिसके कारण बादशाहपुर से 14 मुस्लिम परिवार अपने मकानों में ताला लगाकर चले गए, तो वहीं सैक्टर 70 में करीब 200 परिवार शहर छोड़कर चले गए.
सेक्टर-70 की झुग्गियों में रहने वाली ज्यादातर आबादी पश्चिम बंगाल और झारखंड से आए प्रवासी मजदूरों की है. यहां पर रहने वाली जरीना आस-पास के फ्लैट्स में झाड़ू पोछा का काम करती हैं लेकिन हिंसा के चलते वह अपने परिवार समेत शहर छोड़कर जा रही हैं. जरीना ने बताया कि स्थानीय लोग उन्हें लगातार जान से मारने की धमकी दे रहे हैं.
वहीं, सकीना ने कहा, "हमें धमकी दी जा रही है कि तुम लोग यहां से चले जाओ नहीं तो तुम सबको को मार देंगे और झुग्गी जला देंगे."
इसके अलावा आसपास के इलाके के लोग बार-बार आकर मजदूरों को धमकी दे रहे हैं. यहां तक कि रिपोर्टिंग के दौरान हमें भी धमकी दी गई और कैमरा बंद करवा दिया गया.
ऐसे में सवाल यह उठता कि इस हिंसा के पीछे कौन है? गुरुग्राम में इन परिवारों को पलायन पर मजबूर कौन कर रहा है? यह रिपोर्ट इन्हीं सवालों की पड़ताल करती है. देखिए हमारी यह वीडियो रिपोर्ट.
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