उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, अपनी जनसभाओं में बुंदेलखंड में लंबे समय से चली आ रही पानी की किल्लत को हल कर देने के दावे कर रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी और उसके नेता, अपने प्रचार अभियान में बुंदेलखंड में पानी की समस्या को हल कर देने और घर-घर पानी पहुंचा देने को सरकार की उपलब्धि की तरह गिना रहे हैं. हालांकि धरातल पर सच्चाई और भारत सरकार के आंकड़े इन दावों को खोखला साबित करते हैं.
न्यूज़लॉन्ड्री ने बुंदेलखंड के महोबा जिले में कई गांवों में जाकर सरकार के घर-घर पानी पहुंचाने के दावों की पड़ताल की. हमने देखा कि अनेकों जगह, लोग कपड़े व बर्तन धोने से लेकर पीने के पानी के लिए घरों से दूर लगे सार्वजनिक हैंडपंप और नलों पर निर्भर हैं. आमतौर पर घर की महिलाओं को पानी जैसी नैसर्गिक आवश्यकता को पूरा करने के लिए घर से दूर जाना पड़ता है, जरूरत पड़ने पर उन्हें ऐसा दिन में कई बार भी करना पड़ जाता है.
कुछ लोगों ने यह तक कहा कि वे ऐसा पिछले बहुत सालों से करते आ रहे हैं. देखिए बुंदेलखंड के महोबा जिले से न्यूज़लॉन्ड्री की यह रिपोर्ट.
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