
कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट यानी सीपीजे ने पत्रकारों की स्थिति को लेकर अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की है. रिपोर्ट के मुताबिक चीन में पत्रकारों की सबसे बुरी स्थिति है. वहीं भारत में कुल पांच पत्रकारों की हत्या उनके काम की वजह से हुई है.
सीपीजे की रिपोर्ट में बताया गया कि साल 2021 प्रेस की स्वतंत्रता के लिए अच्छा नहीं रहा. इस साल पूरे विश्व में 293 पत्रकारों को उनकी पत्रकारिता को लेकर जेल में डाला गया. साल 2020 में यह आंकड़ा 280 था. इस साल अभी तक 24 पत्रकारों की मौत हुई है.
भारत को लेकर कहा गया है कि साल 2018 के बाद इस साल सबसे ज्यादा मौतें पत्रकारों की हुई हैं. जिन पांच पत्रकारों की मौत हुई है उसमें अविनाश झा बीएनएन न्यूज़ बिहार, चेन्नाकेशवालू ईवी-5 आंध्र प्रदेश, मनीष कुमार सिंह सुदर्शन टीवी बिहार, रमन कश्यप साधना प्लस टीवी उत्तर प्रदेश, सुलभ श्रीवास्तव एबीपी गंगा, उत्तर प्रदेश के हैं.
रिपोर्ट में कहा गया इन पांचों पत्रकारों में से चार पत्रकार स्थानीय टीवी समाचार चैनलों में काम करते थे. इन सभी को उनकी आलोचनात्मक पत्रकारिता के कारण मार दिया गया.
सीपीजे ने अपनी रिपोर्ट में जेल में बंद पत्रकारों को लेकर भी जानकारी दी है. पत्रकारों को जेल में डालने के मामले में चीन में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है. वहां 50 पत्रकारों को जेल में डाला गया है. इसके बाद म्यांमार, तीसरे नबंर पर मिस्र, चौथे पर वियतनाम और पांचवें पर बेलारूस है.
रिपोर्ट में कहा गया कि 1 दिसंबर 2020 तक म्यांमार में कोई पत्रकार जेल में बंद नहीं था, लेकिन तख्तापलट के बाद 26 पत्रकारों को जेल में डाल दिया गया. भारत की बात करें तो इस समय कुल सात पत्रकार जेल में बंद हैं. सीपीजे ने बताया की जेलों में बंद पत्रकारों की 1992 से शुरू की गई गिनती के बाद से भारत में यह सर्वाधिक संख्या है. सात में से पांच पत्रकारों को तो गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत जेल भेजा गया है.
बता दें कि कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट हर साल पत्रकारों की स्थिति को लेकर रिपोर्ट जारी करता है. साथ ही समय-समय पर पत्रकारों के लिए सलाह और सुझाव भी जारी करता है. सीपीजे ऐसे लोगों को पत्रकारों के रूप में परिभाषित करता है जो प्रिंट, फोटोग्राफी, रेडियो, टेलीविजन और ऑनलाइन सहित किसी भी मीडिया में काम करते हैं.
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