
एनएल चर्चा के इस अंक में अमर जवान ज्योति का राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में विलय, भारत में बढ़ते कोरोना के मामले, केरल के स्वास्थ्य मंत्री की ओमीक्रॉन को लेकर चेतावनी, दिल्ली में कोरोना की कम हो रही टेस्टिंग, बीजेपी में शामिल हुई मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा यादव, कोरोना के कारण हो रहा पहला वर्चुअल चुनाव, पंजाब में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के रिश्तेदारों पर ईडी की छापेमारी आदि विषयों पर बातचीत हुई.
चर्चा में इस हफ्ते बतौर मेहमान वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश सिंह शामिल हुए. न्यूज़लॉन्ड्री के स्तंभकार आनंद वर्धन और न्यूज़लॉन्ड्री के एसोसिएट एडिटर मेघनाद एस ने भी हिस्सा लिया. चर्चा का संचालन कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.
मुलायम सिंह यादव की छोटी बहु अपर्णा यादव के बीजेपी में शामिल होने को लेकर अतुल कहते हैं, "मुलायम सिंह यादव की छोटी बहु अपर्णा यादव ने बीजपी का हाथ थाम लिया है. उनको लेकर कई बातें की जा रही है. वह राजनीतिक रुप से बहुत महत्वकांक्षी हैं. वह बीजेपी की नीतियों का समर्थन करती रही हैं, साथ ही प्रधानमंत्री के साथ सेल्फी खिंचवाना, आरक्षण का विरोध करना यह सब दिखाता है कि वह भाजपा के करीब रही है.”
अतुल आगे कहते हैं, “एक ऐसे समय में जब बीजेपी छोड़कर नेता सपा में जुड़ रहे हों तब यादव परिवार की बहू का बीजेपी में जाना एक बड़ा प्रतीकात्मक संदेश देता है. वह बीजेपी की चुनावी स्थिति को कितना बदल सकती है इसमें किसी को संदेह नहीं है कि उनकी जमीनी पकड़ शून्य है, वह कोई जन नेता नहीं है. उनकी जो भी हैसियत या पहचान है वह सब मुलायम सिंह के परिवार से आती है. इसके बावजूद उन्होंने अपना राजनीतिक भविष्य भाजपा में देखने का फैसला क्यों किया?"
उर्मिलेश जवाब देते हुए कहते हैं, “अपर्णा के हिसाब से यह समझदारी भरा फैसला हो सकता क्योंकि वह एक बड़ी राष्ट्रीय पार्टी से जुड़ी हैं. लेकिन राजनीतिक तौर पर यह गलत फैसला है. वह सपा में जरुर थी लेकिन वह बीजेपी की विचारधारा से ही उनकी करीबी थी. यह उनके मिजाज वाली पार्टी है. आरक्षण को लेकर जो उनका विचार, उसका विरोध तो आज मोहन भागवत भी नहीं करेंगे. मेरे हिसाब से उनका बीजेपी में जाना सपा के लिए भी अच्छा है.”
इस विषय पर जवाब देते हुए आनंद कहते हैं, “अपर्णा का बीजेपी में शामिल होना प्रतीकात्मक ही है. उनका कोई राजनीतिक क़द नहीं है जिसका जमीन पर असर दिख सके. जो भी लोहियावादी पार्टियां हैं वह परिवारवाद से जकड़ी हुई है. परिवार में मतभेद तो होना ही है, जैसा पहले शिवपाल ने किया, महाराष्ट्र में राज ठाकरे ने किया. हालांकि इन पार्टियों में बाद में साफ हो गया कि पार्टी का नेतृत्व कौन करेगा. जैसे सपा में अखिलेश, तमिलनाडु में स्टालिन, शिवसेना में उद्धव ठाकरे, राजद में तेजस्वी. एक संदेश है जिसका बीजेपी फायदा उठाएगी वह है कि परिवादवाद की पार्टी अपना खुद का भी परिवार संभाल के नहीं रख सकती.”
मेघनाद कहते है, “मुझे यूपी की राजनीति की समझ थोड़ी कम है इसलिए मैं ज्यादा नहीं बोल पाउंगा. हालांकि मैंने अपर्णा के ज्वाइन करने के दौरान का वीडियो देखा जिसमें वह बीजेपी के पार्टी अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह से कह रही हैं कि ‘राष्ट्रवाद वाली लाइन इसमें जोड़ दें.’ बीजेपी में जुड़ने से दस दिन पहले तक वह बीजेपी पर महिलाओं के लिए कुछ नहीं करने को लेकर आरोप लगा रही थीं और अब बीजेपी में शामिल हो गईं.”
इसके अलावा चंद्रशेखर आजाद के गोरखपुर शहर की सीट से, योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ने को लेकर भी चर्चा में विस्तार से बातचीत हुई. पूरी बातचीत सुनने के लिए हमारा यह पॉडकास्ट सुनें और न्यूज़लॉन्ड्री को सब्सक्राइब करना न भूलें.
टाइमकोड
00-1:40 - इंट्रो
2:00-4:01 - जरुरी सूचना
4:02- 8:30 - हेडलाइंस
8:32- 27:45 - कोरोना की कम होती जांच और नई गाइडलाइन
27:51- 1:14:30 - अपर्णा यादव बीजेपी में शामिल और चंद्रशेखर आजाद का चुनाव लड़ने का ऐलान
1:14:35-1:26:00 - ईडी और आयकर की छापेमारी
1:26:01-1:37:50 - चर्चा लेटर
1:37:51 - सलाह और सुझाव
पत्रकारों की राय, क्या देखा, पढ़ा और सुना जाए.
मेघनाद एस
ओमप्रकाश राजभर का इंटरव्यू - लल्लनटॉप
संजय सिंह का इंटरव्यू - लल्लनटॉप
आईसीएचआर पर आरएसएस के कब्जे की कहानी - आयुष तिवारी की रिपोर्ट
आनंद वर्धन
पवन वर्मा की किताब - ‘द ग्रेट हिंदू सिविलाइजेशन : अचीव्मेंट, नेगलेक्ट, बायस ऐंड द वे फॉरवर्ड’
श्रुति कपिला की किताब- वायलेंट फ्रेटरनिटी
उर्मिलेश सिंह
एचडी देवगौड़ा की जीवनी- फियूरोज इन द फिल्ड
कंचा इलैय्या और कार्तिक कुरुपास्वामी की किताब - द शूद्रा
अतुल चौरसिया
समर्थ बंसल का टेकफोग रिपोर्ट को लेकर ब्लॉग
जिम कार्बेट की किताब - मैनईटर्स ऑफ कुमाऊं
आईसीएचआर पर आरएसएस के कब्जे की कहानी - आयुष तिवारी की रिपोर्ट
प्रोड्यूसर- लिपि वत्स/रौनक भट्ट
एडिटिंग - उमराव सिंह
ट्रांसक्राइब - अश्वनी कुमार सिंह / सृष्टि जाटव
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