
इस साल अमूल ने तीन बार अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ाई लेकिन आपके लिए यह जानना जरूरी है कि दूध की ये खुदरा कीमतें गुजरात में नहीं बढ़ाई गईं.
चुनावी साल में दूध की खरीद और बिक्री की कीमतें बढ़ाने का एक पूरा पैटर्न है. गुजरात का एक तिहाई मतदाता सीधे इसकी जद में आता है. नीतिगत तरीके से इस एक तिहाई वोटर की मानसिकता को प्रभावित करने का यह ऐसा संगठित तरीका है, जिससे निपटने का उपाय फिलहाल चुनाव आयोग, न्यायपालिका और तमाम लोकतांत्रिक संस्थानों के पास नहीं है.
आपकी जेब से निकलने वाला पैसा गुजरात के चुनावों पर परोक्ष तरीके से असर डालता है. यह पैसा सीधे-सीधे गुजरात के एक तिहाई वोटरों की जेब में जाता है और इसके जरिए गुजरात में भाजपा की राजनीति का रंग चोखा हो जाता है.
इस वीडियो रिपोर्ट में हम जानेंगे कि किस तरह से अमूल दूध की कीमत का खेल, अपरोक्ष रूप से या छिपे तौर पर भारतीय जनता पार्टी को चुनावी फायदा पहुंचाता है. गुजरात के एक तिहाई मतदाताओं को अपने पक्ष में गोलबंद करने का यह खेल कैसे खेला जाता है?
यह जानने के लिए देखिए पूरी रिपोर्ट -
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