
क्या बंगाल चुनाव में भाजपा की लहर थी. क्या उसने सारी सीटें खुद जीती या भाजपा विरोधी वोटों के बिखराव ने इस जीत को और बड़ा कर दिया? एसआईआर, सत्ता विरोधी लहर, केंद्रीय जांच एजेंसियों की ताबड़तोड़ कार्रवाई, गृहमंत्री अमित शाह की चुनावी रणनीति, मोदी का करिश्माई चेहरा, डबल इंजन सरकार के सपने, महिला सुरक्षा और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों की अपनी भूमिका हो सकती है. लेकिन इन सबके अलावा अगर सिर्फ विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की टीम एकजुट होती तो क्या तब भी बंगाल में वैसा ‘परिबर्तन’ होता. जैसा अब हुआ है.?
कांग्रेस, लेफ्ट की पार्टियां और टीएमसी अगर गठबंधन में चुनाव लड़ती तो नतीजों पर कैसा प्रभाव पड़ता. जानने के लिए देखिए चुनावी नतीजों का ये सारांश.
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